March 12, 2026

नई दिल्ली:-SC/ST Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आया एक अहम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि दीवानी विवाद (जमीन और संपत्ति से जुड़े मामले) में एससी एसटी एक्ट (SC/ST Act) लागू नहीं हो सकता

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि दीवानी विवाद (जमीन और संपत्ति से जुड़े मामले) में एससी एसटी एक्ट (SC/ST Act) लागू नहीं हो सकता । शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अनुसूचित जाति समुदाय का कोई व्यक्ति अपने और उच्च जाति समुदाय के किसी सदस्य के बीच विशुद्ध रूप से दीवानी विवाद को एससी और एसटी (अत्याचार निवारण )अधिनियम के दायरे में लाकर इस कड़े दंड कानून को हथियार नहीं बना सकता

यह आदेश तमिलनाडु में हुए एक विवाद को लेकर दिया गया
भक्तवतचलम जो अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित हैं ,ने एक खाली भूखंड पर एक घर निर्माण किया था इसके बाद उच्च जाति समुदाय के सदस्यों द्वारा उनके भूखंड के बगल में एक मंदिर का निर्माण किया जाने लगा

मंदिर के संरक्षकों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि भक्तवतचलम ने भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने घर के भूतल और पहली मंजिलों में अनाधिकृत निर्माण कराया है जिसके जवाब में दी भक्तवतचलम ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत एक शिकायत दर्ज कराई जिसमें उन्होंने आरोप लगाया की मंदिर का निर्माण आम रास्ते ,सीवेज और पानी की पाइप लाइनों पर अतिक्रमण करके हो रहा है उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उच्च जाति समुदाय के लोग सिर्फ उन्हें परेशान करने के लिए उनके घर के बगल में मंदिर निर्माण करवा रहे हैं पी. भक्तवतचलम ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उन्हें अपनी संपत्ति के शांतिपूर्ण आनंद से इसलिए वंचित किया जा रहा है क्योंकि वह SC समुदाय से आते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के निर्णय को रद्द करते हुए उच्च जाति को बड़ी राहत दी ऐसा लिखते हुए न्यायमूर्ति एम आर शाह ने कहा ऐसा लगता है कि दोनों पक्षों के बीच निजी विवाद को आपराधिक कार्रवाई में बदल दिया गया अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 की धारा 3 (1) (v) और (v) (a) के तहत अपराधों के लिए आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का प्रयास किया गया इसलिए यह और कुछ नहीं बल्कि कानून और अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है रिकॉर्ड रखे दस्तावेजों से हम संतुष्ट हैं कि इस केस में एससी और एसटी अधिनियम के तहत अपराधों के लिए कोई मामला नहीं बनता यहां तक की प्रथम दृष्टया भी नहीं बनता

उत्तर प्रदेश ब्यूरो हेड हिमांशु तिवारी की रिपोर्ट

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