March 12, 2026

*करवा चौथ दीपावली त्यौहारों के पूर्व ही सिंथेटिक प्रदूषित वासी मिठाई के लगने लगे अंबार*

*मोटा मुनाफा कमाने को भंडारित सिंथेटिक मिठाइयां फिर आखिर क्यों अधिकारी अंजान*

*सिंथेटिक मिठाइयों के सेवन से जीवन पर आफत आई फिर क्यों नहीं जिम्मेदारों ने इस पर रोक लगाई*

*बिधूना,औरैया।* करवा चौथ दीपावली आदि त्यौहारों पर मोटा मुनाफा कमाने की मंशा से औरैया जिले के कस्बों गांवों में स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक बिना दूध खोए के केमिकल युक्त सिंथेटिक प्रदूषित वासी मिठाइयां दुकानदारों द्वारा नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए बड़े पैमाने पर अभी से भंडारित कर सरेआम बेची जा रही हैं और इन मिठाइयों के सेवन से जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा होने एवं इसकी शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित जिम्मेदार अंजान बने हुए हैं जिससे बुद्धिजीवियों में भारी नाराजगी भड़क रही है। . करवा चौथ दीपावली आदि त्यौहारों पर मोटा मुनाफा कमाने की मंशा से यूं तो जिले के औरैया, अजीतमल, दिबियापुर, बाबरपुर, कंचौसी, मुरादगंज, ककोर, सहायल, फफूंद, बिधूना रुरुगंज, अछल्दा, नेविलगंज, कुदरकोट, वैवाह, रामगढ़, हरचंदपुर, सहार, बेला, याकूबपुर, मल्हौसी, पुर्वा सुजान, ऐरवाकटरा, उमरैन आदि कस्बों गांवों में 95 प्रतिशत मिठाई विक्रेताओं द्वारा नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए लगातार बिना दूध खोए की केमिकल युक्त सिंथेटिक प्रदूषित बासी मिठाइयों का बड़े पैमाने पर अभी से ही भंडारण कर सरेआम सिंथेटिक मिलावटी मिठाइयां धड़ल्ले पर बिक्री कर जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बारिश उमश के मौसम में यह सिंथेटिक मिठाइयां लोगों के स्वास्थ्य पर और अधिक भारी पड़ती नजर आ रही। आलम यह है कि मिठाई विक्रेताओं द्वारा दिल्ली भरथना कानपुर आगरा समेत कई शहरों से बिना दूध खोए के स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक रसायनों से बनी रंग बिरंगी आकर्षक मिठाइयां काफी सस्ते मूल्य पर खरीद कर लोडरों से भरकर उपरोक्त कस्बों में स्थित अपने गोपनीय गोदामों में भंडारण करने के साथ दुकानों पर रखे काउंटरों में भी बेखौफ होकर सजाए नजर आ रहे हैं। . इस संबंध में कुछ दुकानदारों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि वह पहले सिंथेटिक मिठाइयां नहीं बेचते थे लेकिन अब जब अधिकांश दुकानदार सिंथेटिक मिठाइयां बेच रहे हैं तो उनका धंधा प्रभावित होने से उनकी भी मजबूरी है क्योंकि यह सिंथेटिक मिठाइयां अधिक सस्ते मूल्य पर मिल जाती हैं और मुनाफा अधिक होता है और दूध खोए से मिठाइयां तैयार करने पर मिठाइयों में लागत अधिक आती है और मुनाफा मामूली होता है। हालांकि यह सिंथेटिक प्रदूषित वासी मिठाइयां सेवन कर्ताओं के स्वास्थ्य पर लगातार भारी पड़ती नजर आ रही हैं और इसके खिलाफ क्षेत्रीय बुद्धिजीवियों द्वारा लगातार आवाज उठाए जाने के बावजूद भी इस पर अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं जिससे लोगों में आक्रोश भड़क रहा है। इस संबंध में जनचर्चा तो आम यह है कि संबंधित अधिकारियों व मिठाई विक्रेताओं की मिलीभगत है और संबंधित अधिकारी मिठाई विक्रेताओं से मोटी बधौरी वसूल रहे हैं शायद इसी कारण इस पर अंकुश नहीं लग रहा है। हालांकि इस संबंध में पूछे जाने पर खाद्य निरीक्षण विभाग के अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की बधौरी वसूलने की बात से साफ इंकार करते हुए किसी भी कीमत पर सिंथेटिक मिठाइयों की बिक्री न होने देने और जल्द जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।

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