*प्रहलाद चरित्र, समुद्र मंथन,व वामन अवतार का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु*
*सराय बिहारीदास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा*
फफूंद। औरैया
सराय बिहारीदास ग्राम में पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में चौथे दिन कथा वाचक निर्मल चेतन्य ने प्रहलाद चरित्र समुद्र मंथन वामन अवतार की कथा सुनाई।
गुरुवार को श्री मध्य भागवत कथा के चौथे दिन वातावरण भक्ति और उल्लास से सरावोर रहा कथा वाचक निर्मल चेतन्य ने कथा की शुरुआत प्रहलाद की अमर कथा से की उन्होंने कहा भक्त प्रहलाद की भक्ति ने अधर्म के प्रतीक हिरण्यकश्यप के साम्राज्य को हिला दिया और यह सिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी अटूट विश्वास इंसान को डिगने नहीं देता। इसके बाद समुद्र मंथन की अध्यात्मपूर्ण कथा सुनाई गई। आचार्य निर्मल चेतन्य ने कहा यह केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन का गूढ़ दर्शन है।जीवन में बिष और अमृत दोनों मिलते हैं परंतु धैर्य और विवेक से अमृत की प्राप्त संभव है।कथा क्रम में आगे वामन भगवान की लीला का वर्णन किया आचार्य ने बताया जब भगवान विष्णु छोटे ब्राह्मण बालक बनकर राजा वली से तीन पग भूमि मांगते हैं और सम्पूर्ण ब्रह्मांड को नाप लेते हैं।कथा के अंत में आचार्य निर्मल चेतन्य ने कहा भागवत कथा केवल श्रवण करने का बिषय नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात करने योग्य है। प्रहलाद की भक्ति समुद्र मंथन की नीति वामन की विनम्रता हमें सिखाते हैं।कि जीवन को धर्म भक्ति और सेवा के मार्ग पर कैसे आगे बढ़ाया जाएं।
