*नई पाठ्यपुस्तकों व नवीन शिक्षण विधियों पर शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण*
*प्राथमिक अध्यापकों को दिया एफएलएन प्रशिक्षण*
*बच्चों में दक्षता हासिल कराने को एफएलएन प्रशिक्षण शुरू*
*सहार,औरैया।* निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) तथा एनसीईआरटी आधारित नवीन पाठ्यक्रम को लेकर सहार विकासखंड पर चल रहे पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन प्रिंट रिच सामग्री व गणित की कक्षा में प्रभावी शिक्षण प्रक्रिया, प्रक्रियात्मक प्रवाह आदि की जानकारी दी गयी। इस दौरान खण्ड शिक्षा अधिकारी उपेंद्र विश्वकर्मा व एसआरजी टीम के सदस्यों सुनील दत्त राजपूत व सुभाष रंजन द्विवेदी ने प्रशिक्षण का अनुश्रवण किया। इस दौरान एसआरजी सुनील दत्त ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के नवीनतम शिक्षण विधियों से परिचित कराना है, ताकि वे छात्रों में पढ़ने, लिखने और गणित की मूलभूत क्षमताओं का विकास बेहतर तरीके से कर सकें।
ट्रेनिंग में विकासखंड के शिक्षकों को 50 -50 के दो बैच में ट्रेनिंग दी गयी, इस दौरान उपस्थित शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विषयवस्तु की गहराई तक समझ विकसित करने में रुचि दिखाई।प्रशिक्षण सत्रों का संचालन ब्लॉक स्तरीय संदर्भदाताओं एआरपी प्रदीप कुमार, लक्षयदीप राजपूत के अतिरिक्त अमर सिंह, सुबोध कुमार व राजा सिंह द्वारा किया गया। प्रशिक्षण का प्रत्येक सत्र व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ संचालित हुआ, जिसमें शिक्षकों को वर्तमान शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया गया। सत्रों में प्रतिभागियों को शिक्षण रणनीतियों की पुनरावृत्ति, शैक्षिक योजना निर्माण, निपुण भारत मिशन के अद्यतन उद्देश्यों की गहन समझ, कक्षा में गणित विषय की प्रभावी शिक्षण प्रक्रिया, गणितीय संक्रियाओं को सरल तरीकों से बच्चों तक पहुँचाने के उपाय, तथा नवीन शैक्षिक पोस्टर-चार्ट आदि के प्रयोग संबंधी जानकारियाँ दी गईं। विशेष रूप से आगामी शैक्षिक सत्र 2025-26 से कक्षा 1 से 3 तक लागू होने वाले एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम की विशेषताओं पर केंद्रित चर्चा की गई। इस पाठ्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं जैसे तर्कशीलता, चिंतनशीलता, जेंडर समानता, सांस्कृतिक जुड़ाव, बहुभाषिकता और सूचना प्रौद्योगिकी के एकीकरण को विस्तार से समझाया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि यह पाठ्यक्रम न केवल बच्चों के संज्ञानात्मक विकास को गति देगा, बल्कि उन्हें 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम भी बनाएगा। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने ब्लॉक स्तरीय संदर्भदाताओं से गहन व तार्किक प्रश्न पूछकर विषय की गहराई में उतरने का प्रयास किया, जिससे चर्चा और भी समृद्ध हुई। इस दौरान विकास खंड के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक मौजूद रहें।
