*हैदरपुर में धर्म, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी बह रही है-प्रणव पुरी जी महाराज*
*अजीतमल,औरैया।* क्षेत्र के ग्राम हैदरपुर स्थित पक्का तालाब के निकट चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास, महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज (उज्जैन) ने भक्तों को कथा का महत्व बताते हुए कहा कि जहाँ भी कथा का आयोजन होता है, वहाँ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी स्वतः प्रवाहित होती है। इसलिए जीव को कथा का श्रवण और मनन अवश्य करना चाहिए।पुरी जी महाराज ने सूद जी महाराज द्वारा नेमीशारण्य में सुनकादिक ऋषियों को दी गई कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि जीव के दुःखों का अंत ही वास्तविक कल्याण है। भगवान के श्रीचरणों में उपजे प्रेम के बिना जीव मोक्षमार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि इच्छाओं का दमन ही जीवन का परम लक्ष्य है, किंतु चौरासी लाख योनियों में भटकता जीव आज के भौतिकवादी युग में मृगतृष्णा की भांति भागता फिर रहा है, जो उसके दुखों का मूल कारण है। अगले प्रसंग में स्वामी जी ने भगवान शंकर और माता सती की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। तत्पश्चात सीता प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि माताओं को सवर्ण (आकांक्षा/इच्छा) नहीं मांगनी चाहिए, क्योंकि अधिक कामनाएँ ही संकट को जन्म देती हैं। कथा के परीक्षित विमला व सुरेश चंद्र त्रिपाठी सहित त्रिपाठी परिवार ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने की अपील की है।
